नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा संकट को लेकर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच कूटनीतिक वाकयुद्ध एक बार फिर तीखा हो गया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि वर्ष 2026 में अब तक अफ़ग़ान सरज़मीं से योजनाबद्ध और संचालित किए गए आतंकी हमलों में 3,500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
इसके साथ ही पाकिस्तान ने तालिबान प्रशासन द्वारा लगाए गए उन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें पाकिस्तानी सेना पर अफ़ग़ानी नागरिकों को निशाना बनाने का दावा किया गया था।
पाकिस्तान ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शरण लिए बैठे आतंकी संगठनों (विशेषकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP) द्वारा उसकी सीमा के भीतर लगातार घातक हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों में सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों सहित 3,500 से अधिक लोग मारे गए हैं।
अफ़ग़ान विदेश मंत्रालय ने हाल ही में आरोप लगाया था कि 2021 के अंत से (तालिबान के सत्ता में आने के बाद से) अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य अभियानों और हवाई हमलों के कारण 1,119 अफ़ग़ान नागरिक हताहत (मृत या घायल) हुए हैं। पाकिस्तान ने इन आरोपों को “झूठा और बेबुनियाद” बताते हुए कहा कि उसकी कार्रवाई केवल चिन्हित आतंकी ठिकानों के खिलाफ ‘आत्मरक्षा’ में की जाती है।
इस्लामाबाद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र (UN) से अपील की कि वे अफ़ग़ानिस्तान के सत्तारूढ़ तालिबान शासन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के तहत उनकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की याद दिलाएं। पाकिस्तान का कहना है कि तालिबान अपनी ज़मीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के ख़िलाफ़ आतंकवाद के लिए न होने देने के अपने वादे को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है।
अफ़ग़ानिस्तान में अगस्त 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच डूरंड लाइन और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को लेकर संबंध लगातार बिगड़ते गए हैं।
पाकिस्तान का मुख्य आरोप यह है कि टीटीपी (TTP) के आतंकवादी अफ़ग़ान सरज़मीं का इस्तेमाल सुरक्षित पनाहगाह के रूप में कर रहे हैं और वहीं से पाकिस्तानी सीमाओं, चौकियों व शहरों पर हमलों की योजना बनाते हैं। वहीं, तालिबान प्रशासन इन आरोपों को खारिज करता आया है। दोनों देशों के बीच सीमा पर जारी यह गोलाबारी और सैन्य गतिरोध पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

